सुबह टहलना ज्यादा फायदेमंद है या शाम को? जानिए सही समय और सही तरीका
सुबह और शाम की वॉक में क्या फर्क है? जानिए किस समय टहलना ज्यादा फायदेमंद होता है, वजन घटाने और सेहत के लिए सही तरीका।
सुबह टहलना ज्यादा फायदेमंद है या शाम को?
टहलना सबसे आसान और सुरक्षित एक्सरसाइज मानी जाती है, जिसे हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है। लेकिन जब बात आती है सुबह और शाम की वॉक की, तो ज्यादातर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं। कोई कहता है सुबह टहलने से वजन तेजी से घटता है, तो कोई मानता है कि शाम को टहलना ज्यादा आरामदायक और आसान होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि वास्तव में किस समय टहलना ज्यादा फायदेमंद है और आपके शरीर के लिए कौन सा समय सही रहेगा।
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सुबह टहलना – दिन की अच्छी शुरुआत
सुबह की ताजी हवा और शांत वातावरण में टहलना शरीर को एक नई ऊर्जा देता है। सुबह की वॉक से मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है, जिससे दिनभर शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न करता है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या अपनी लाइफस्टाइल सुधारना चाहते हैं, उनके लिए सुबह की वॉक काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसके अलावा सुबह टहलने से मन शांत रहता है, सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है और पूरा दिन ज्यादा पॉजिटिव महसूस होता है। हालांकि, सुबह खाली पेट टहलना हर किसी के लिए सही नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें कमजोरी या चक्कर की समस्या रहती है।
शाम को टहलना – तनाव और थकान दूर करने का तरीका
दिनभर की भागदौड़ और काम के बाद शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं। ऐसे में शाम को टहलना एक तरह से रिलैक्सेशन का काम करता है। शाम की वॉक से दिनभर का तनाव कम होता है और दिमाग हल्का महसूस करता है। यह पाचन को बेहतर बनाती है और डिनर से पहले ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में भी मदद करती है। जिन लोगों को सुबह समय नहीं मिल पाता या जो सुबह कमजोरी महसूस करते हैं, उनके लिए शाम की वॉक ज्यादा सुरक्षित और आसान विकल्प होती है। बुजुर्गों के लिए भी हल्की शाम की वॉक अक्सर ज्यादा आरामदायक साबित होती है।
सुबह और शाम की वॉक में मुख्य अंतर
सुबह और शाम की वॉक दोनों के अपने-अपने फायदे होते हैं। सुबह की वॉक आमतौर पर वजन घटाने और दिन की एनर्जी बढ़ाने के लिए बेहतर मानी जाती है, जबकि शाम की वॉक तनाव कम करने और पाचन सुधारने में ज्यादा मदद करती है। सुबह का माहौल शांत और प्रदूषण कम होता है, वहीं शाम को हल्की थकान के बावजूद शरीर ज्यादा वार्म होता है, जिससे चोट लगने का खतरा कम रहता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि सिर्फ एक ही समय सबसे अच्छा है, क्योंकि दोनों का असर शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है।
वजन घटाने के लिए कौन सा समय बेहतर है?
अगर आपका मुख्य उद्देश्य वजन कम करना है, तो सुबह की वॉक आमतौर पर ज्यादा असरदार मानी जाती है क्योंकि इस समय शरीर फैट को एनर्जी के रूप में जल्दी इस्तेमाल करता है। सुबह टहलने से पूरे दिन एक्टिव रहने में मदद मिलती है, जिससे कुल कैलोरी बर्न बढ़ जाती है। लेकिन अगर सुबह टहलने से आपको कमजोरी महसूस होती है या नियमितता बन नहीं पाती, तो जबरदस्ती सुबह की वॉक करना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में शाम की वॉक भी धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से वजन घटाने में मदद कर सकती है, बशर्ते आप इसे रोजाना करें।
उम्र और बीमारी के हिसाब से सही समय
हर व्यक्ति की उम्र, सेहत और दिनचर्या अलग होती है, इसलिए टहलने का सही समय भी अलग-अलग हो सकता है। युवा और स्वस्थ लोग सुबह या शाम किसी भी समय टहल सकते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए शाम की हल्की वॉक ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। शुगर के मरीजों को अक्सर शाम को खाना खाने से पहले टहलने की सलाह दी जाती है, ताकि ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे। वहीं, जिन लोगों को ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी समस्या है, उन्हें टहलना शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
सही तरीके से टहलना क्यों जरूरी है?
सिर्फ टहलना ही काफी नहीं होता, बल्कि टहलने का तरीका भी उतना ही जरूरी होता है। बहुत तेज या बहुत धीमी चाल से चलने पर शरीर को पूरा फायदा नहीं मिल पाता। टहलते समय आरामदायक जूते पहनना चाहिए, शरीर को सीधा रखना चाहिए और मोबाइल देखते हुए चलने से बचना चाहिए। रोज एक ही समय पर टहलने की आदत डालने से शरीर जल्दी उस रूटीन को अपनाता है और लंबे समय तक फायदा मिलता है। गलत तरीके से टहलने पर घुटनों और पैरों में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
निष्कर्ष – सुबह या शाम, कौन बेहतर?
सुबह टहलना ज्यादा फायदेमंद है या शाम को, इसका एक ही जवाब हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकता। अगर आप वजन घटाना चाहते हैं और सुबह समय निकाल सकते हैं, तो सुबह की वॉक एक अच्छा विकल्प है। वहीं, अगर आप दिनभर के तनाव से राहत चाहते हैं या सुबह टहलना मुश्किल लगता है, तो शाम की वॉक भी उतनी ही फायदेमंद साबित हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि आप नियमित रूप से टहलें, क्योंकि समय से ज्यादा अहमियत निरंतरता की होती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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